विरोध या अपराध? दिल्ली में पेपर लीक प्रोटेस्ट के दौरान PM मोदी पर टिप्पणी, 25 साल की महिला पर FIR दर्ज :
जंतर-मंतर पर छात्रों का गुस्सा, पुलिस का एक्शन और नया BNS कानून—पढ़िए क्या है पूरा मामला और क्यों छिड़ी है अभिव्यक्ति की आजादी पर नई बहस।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर पेपर लीक के खिलाफ गर्माया छात्रों का आंदोलन अब एक बड़े कानूनी विवाद में बदल गया है। प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करने के आरोप में 25 वर्षीय रुचिका सिंह के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है।
जिस प्रदर्शन को युवाओं की आवाज माना जा रहा था, वह अब सीधे भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं और अभिव्यक्ति की आजादी (Free Speech) की बहस के बीच आकर खड़ा हो गया है। uchika Singh Jantar Mantar Protest
क्या है पूरा मामला?
- प्रदर्शन की जगह: दिल्ली का ऐतिहासिक जंतर-मंतर।
- संगठन: ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के बैनर तले 23 जुलाई को हुआ था प्रदर्शन।
- मुख्य आरोप: शिकायतकर्ता के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान पीएम ऑफिस की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली भाषा का इस्तेमाल किया गया, जिससे सार्वजनिक शांति और सौहार्द बिगड़ने का खतरा था।
- पुलिस की कार्रवाई: मामले में पहले नोएडा के एक्सप्रेस-वे थाने में Zero FIR दर्ज की गई, जिसे अब आगे की जांच के लिए नई दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में ट्रांसफर कर दिया गया है।
नए कानून (BNS) की किन धाराओं में फंसा मामला?
पुलिस ने रुचिका सिंह के खिलाफ नए भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत केस दर्ज किया है:
- धारा 352: शांति भंग करने के इरादे से उकसाना।
- धारा 353(1): सार्वजनिक उपद्रव (Public Mischief) भड़काने वाले बयान।
- धारा 356(1): मानहानि (Defamation)।
कानूनी एक्शन पर छिड़ा बवाल: पक्ष और विपक्ष
मामले पर सीजेपी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने बयान देते हुए कहा:
“अगर गलत या आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल हुआ है, तो सिविल या क्रिमिनल मानहानि का रास्ता खुला है। लेकिन प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए सीधे पुलिस और आपराधिक धाराओं का इस्तेमाल करना पूरी तरह गलत है। यह युवाओं और प्रदर्शन करने वालों में डर का माहौल (Chilling Effect) पैदा करता है।”
उन्होंने युवाओं को भी अपनी भाषा के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी, लेकिन साथ ही पुलिस से अपनी शक्तियों का राजनीतिक दुरुपयोग न करने का आग्रह किया।
आगे क्या?
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि हाल ही में दिल्ली सरकार के गृह मंत्री आशीष सूद ने यह रुख साफ किया था कि छात्रों और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी—जब तक कि उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड न हो या वे हिंसा में शामिल न हों।
अब देखना यह होगा कि पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन की जांच में यह मामला किस दिशा में जाता है और क्या राजनीतिक मर्यादा की रक्षा के नाम पर दर्ज यह FIR कानूनी तौर पर टिक पाती है या नहीं।
Author: Ayush Saini